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तालाब का पानी गंदा हो जाता है , क्ोंकक वह बहता नहीं। चूँकक वह बहता नहीं, इसकलए उसका पानी जहाूँ

का तहाूँ ही बना रहता है । जबकक नदी का पानी साफ रहता है और न जाने कहाूँ से चलकर कहाूँ पहूँ च
जाता है , क्ोंकक वह बहता है । बहाव में ही शुद्धता है , बहाव में ही जीवन है और बहने में ही नदी के कल-
कल का संगीत भी। मतलब यह कक यकद गकत है , तो जीवन है और गकत नहीं है तो वह जड़ है , मृत है ।

बनते कबगड़ते हालातों का


कहसाब है कजंदगी,
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है कजसमें
वो ही एक ककताब है कजंदगी।
हर पल एक नया ककस्सा,
तैयार रहता है अपना अंत पाने को,
ग़मों के दौर में, खुकशयों की राह तकते हैं कई लोग
तड़पते हैं पेड़ और पंछी पतझड़ में जैसे बसंत पाने को।

कनकित रूप से गकतशील होने में तकलीफ तो होगी। लेककन मैं समझता हूँ कक गकतशील न रहने में शायद
उससे भी अकिक तकलीफ हो जाती है । इसके बावजद ज्यादातर कवद्यार्थी गकतहीनता को ही पसंद करते
हैं । वे अपने स्र्थान से कहलना नहीं चाहते। वे अपने स्र्थान से दसरी जगह जानानहीं चाहते। वे अपने
आसपास के वातावरण के अपनी चल रही जीवन पद्धकत के चाहे वह ककतनी ही बेकार क्ों न हो, इतने
अकिक अभ्यस्त हो जाते हैं कक उससे कनकलने में उन्हें बहत तकलीफ होने लगती है । और बस यही जीवन
के सारे अवसर और सारा समय उन्हें छोड़कर ककसी और के पास चला जाता है ।

"कजंदगी ते रा दस्तर समझ नही आया...क्ा है मे रा कसर समझ नही आया...


तेरी हर एक चाल पे ,नज़र रखता हूँ मै ...कफर भी ते रा फतर समझ नहीं आया..."
कनराशा के क्षणों को कभी भी जीवन पर हावी न होने दें । बल्कि जीवन के हताशा भरे क्षणों से कुछ सीखने
का प्रयास करें । इन लम्ों से उबरकर आगे बढ़ना और खुद को बेहतर बनाने की कोकशश ही हमारा लक्ष्य
होना चाकहए।

चाहे कामकाजी जीवन हो, व्यल्किगत संबंि या कफर स्वास्थ्य से जुड़ी परे शाकनयां , इन सभी कारणों से हमारे
जीवन में कनराशा के क्षण आते हैं । कुछ ऐसे क्षण जब हम अपनी शल्कि और सामर्थ्य को कम महसस करने
लगते हैं । खुद को असमर्थय और असहाय पाते हैं ।

लगने लगता है कक हम जीवन को आगे ले जाने में खुद को सामर्थ्यवान नहीं पा रहे हैं । कनराशा के ऐसे क्षण
हमें अवसाद और दु ख भी दे ते हैं । लेककन कनराशा को जीवन पर हावी होने कदया जाए तो जीवन की
स्वाभाकवक गकत प्रभाकवत होने लगती है इसकलए उन पलों से बाहर आ जाने का अर्थय ही जीवन है ।

कई बार पवय में दु र्यटनाएं हमारे मन को अपने कब्जे में कर रखती हैं और हम खुद को उनसे मुि कर पाने
में ककिनाई अनुभव करते हैं ।
आगे बढ़ने की राह में वे सबसे बड़ी बािा हैं । हार, असफलता और तकलीफों से उपजी कनराशा को पीछे
छोड़कर ही जीवन को अच्छे से कजया जा सकता है । अपनी कनराशाओं से उबरने के कलए कुछ छोटे प्रयास
कारगर कसद्ध हो सकते हैं ।

अपेक्षाओं को कम रखें

इस बात का स्मरण रहे कक हमेशा ही जीवन में जीत नहीं कमलती है । हर उम्मीदवार को नौकरी नहीं कमल
जाती है , हर काम पक्ष में ही नहीं हो पाता है । जीवन तो उतार चढ़ाव का नाम है । यहां हर तरह की ल्कस्र्थकत
बनती है और आनंद भी इसी में है । इसकलए हर ल्कस्र्थकत में सहज रहना जरूरी है । लेककन इसका अर्थय यह
नहीं कक आप अपने कलए ऊंचे लक्ष्य तय ही न करें । अपने लक्ष्य ऊंचे रखें लेककन उन लक्ष्यों के परा न होने
पर भी जीवन को रुकने न दें ।

ककंग सोलोमन ने एक जगह कलखा है , जब मैं उन चीजों को दे खता हं कजन्हें पाने के कलए मैंने कडी मेहनत
की तो वे सारी चीजें बहत अर्थयहीन नजर आती हैं ... मुझे ऐसा लगता है मानो मैं हवा का पीछा कर रहा र्था।
इसकलए अपनी अपेक्षाओं का एक संतुलन बनाना जरूरी है । उनके कलए प्रयास हो लेककन प्रयास सफल न
होने पर कनराशा र्र न करे । अपने मन का हो तो अच्छा और न हो तो और भी अच्छा के भाव से अपनी
अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करें ।

हार से सीखने का प्रयास करें


असफलता और हार भी हमें बहत कुछ सीखने का मौका दे ती है । जब भी हम हारते हैं या कनराश होते हैं
तब हम िैयय रखना सीखते हैं । हम सफलता के कलए अकिक उद्यत होते हैं । जब भी हार होती है तो उसे इस
तरह ही दे खें कक आपके प्रयास सफलता के कलए पयाय प्त नहीं र्थे और आपको सफलता के कलए और तैयारी
की जरूरत है । कनराशा में ही आशा कछपी होती है ।

किकेट के मैच में एक टीम हारती है लेककन अगले मैच में वह इस हार को भुलाकर जीतने की कोकशश
करती है । ऐसे भी पवयतारोही हैं कजन्हें पवयत ने कई बार हराया लेककन उन्होंने जीत के कलए साहस नहीं हारा
और अंतत: पवयत उनकी इच्छाशल्कि के आगे झुका। तो अपनी हार में उन कारणों को ढं ढने का प्रयास होना
चाकहए कजनसे आप सफलता से दर रहे और उन्हें सुिारने का प्रयास आपको कवजेता बनाता है । जब आप
एक एक करके अपनी कमजोररयों पर काम करते हैं तो आप खुद को कवपरीत पररल्कस्र्थकतयों के योग्य बना
लेते हैं ।

ममत्ों की लें मदद

जब भी जीवन में हताशा से सामना हो तो अपने कमत्ों के सार्थ समय कबताएं । ऐसे समय जबकक आप हताशा
महसस कर रहे हैं तब खुद को दु कनया से अलग-र्थलग न कर लें क्ोंकक इस तरह आप अपने ही कवचारों में
कैद हो जाते हैं । कमत् उन ल्कखड़ककयों की तरह होते हैं कजनसे जीवन में ताजी हवा आती है । चाहे ककतनी भी
कवकट पररल्कस्र्थकत क्ों न हो एक अच्छा कमत् आपको गहन कनराशा के क्षणों से उबारने का काम करता है ।

अक्सर हम पररवार के सार्थ बहत सी बातें साझा नहीं कर पाते हैं क्ोंकक उम्र और समझ का अंतर बीच में
होता है लेककन हमारे कमत् हमारी मनोल्कस्र्थकत और हमारे बताय व को बेहतर तरीके से समझते हैं । वे हमारी
जरूरतों से पररकचत होते हैं और इसकलए उनके सामने अपनी पीड़ा कहने में ककसी तरह की कझझक नहीं
होना चाकहए। वे िीक समािान तलाशने में हमारी मदद करते हैं । एक अच्छा दोस्त कवकट पररल्कस्र्थकतयों में
हमारा सबसे बेहतर मागयदशयक होता है ।

मप्रय चीजों से जुडें

जब भी आप कमजोर क्षणों से गुजरें तो उन चीजों से जुड़ें जो आपको खुशी दे ती हों। आपका आनंद चाहे
जो हो उसमें डबने की कोकशश करें । जब आप अपने आनंद के क्षेत् में डबेंगे तो कनराशा से उबर जाएं गे।
कनराशा हम इसकलए महसस करते हैं कक हमें जीवन का कोई अर्थय नजर नहीं आता है लेककन जब हम अपनी
रूकच की चीजों को दे खते हैं तो जीवन के प्रकत आशा बंिती है ।
कोई अच्छी पुस्तक, ककवता, संगीत, कफल्म या मनबहलाव का कोई भी अन्य माध्यम जो हमारा ध्यान
कनराशा के उन क्षणों से कहीं ओर ले जाता हो वह ऐसे समय में हमारा आश्रय बन सकता है और हमें राहत
दे सकता है ।

भूत ना भमिष्य केिल िततमान

जब भी हम बीती चीजों के बारे में ज्यादा सोचते हैं तो मन में एक अजीब सी उदासी र्र कर ही जाती है ,
इसी तरह भकवष्य के बारे में सोचते हए भी हम आशंककत और डरे हए रहते हैं । इनका असर हमारे वतयमान
को खराब करता है । अगर हम आज में ही कजएं और आज हम क्ा अच्छा कर सकते हैं उस कवचार के सार्थ
आगे बढ़ें तो शायद जीवन में कनराशा के कलए कोई जगह नहीं होगी।

हम जो नहीं कर पाए उसके कलए उदास क्ों होना, हम आज जो कर सकते हैं उस पर बीते कदनों का असर
आल्कखर क्ों आने दे ना चाकहए। बीती बातों को भुलाकर अगर आज में ही अपनी उजाय लगाई जाए तो बेहतर
नतीजे हमें आगे बढ़ने को ही प्रेररत करें गे। कल में अटके रहकर हम अपने आज को भी प्रभाकवत करते हैं
और आने वाले कल को भी।

सभी को प्रसन्न करना असंभि

जब आप अपने आसपास मौजद सभी लोगों को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं तो इस तरह के लक्ष्य को
कभी प्राप्त नहीं कर पाते हैं । ऐसे में कनराशा आपको र्े रे यह बहत संभव है । इस तरह की ल्कस्र्थकत से उपजने
वाली कनराशा से खुद को बचाना हो तो आपको अपनी प्रसन्नाता के कलए काम करना चाकहए। अपनी
प्रार्थकमकताएं तय करना बहत जरूरी है । याद रहे जरूरत से ज्यादा वादे भी हमें हताशा की ल्कस्र्थकत में डाल
सकते हैं ।

मकसी की मदद कीमजए

जब आप ल्कखन्न या हताश महसस कर रहे हैं तो अपने आसपास ककसी की मदद करने का कोई अवसर
तलाकशए। दसरों के सार्थ जुकड़ए। दसरों की प्रसन्नता के कलए छोटा काम हार्थ में लीकजए, आपको अपना
जीवन अर्थयवान नजर आने लगेगा।

जीवन मल्यवान लगने लगेगा। हम अक्सर ढरे पर चलते हए भी जीवन का मल्यां कन करने में असमर्थय हो
जाते हैं । हमें लगता है कक जीवन उतनी ही दर तक है कजतना हम दे ख पा रहे हैं लेककन जीवन उससे भी
आगे है , वहां भी जहां हम नहीं दे ख पा रहे ।
कमय का अर्थय होता है गकतकवकि। इस वि यहां बैिे हए हमारी गकतकवकि चार
आयामों में हो रही है - भौकतक, मानकसक, भावनात्मक और ऊजाय के स्तर
पर। आज आपके जागने के पल से इस पल तक इन चारों कमों में से ककतनों
के प्रकत आप जागरूक रहे हैं? आप नहीं कगन पा रहे होंगे। मैं आपको बता
रहा हं कक यह एक प्रकतशत से भी कम होगा। जब आप अपने कमों के
केवल एक प्रकतशत के प्रकत ही सचेत रहते हैं तो इसका मतलब यह हआ कक
आपकी कजंदगी में सब कुछ संयोग से हो रहा होता है । इसे इस तरह भी कह
सकते हैं कक जब आप सडक़ पर गाड़ी चलाते हैं और एक प्रकतशत समय के
कलए ही आं खें खुली रखते हैं, बाकी समय आं खों को बंद करके गाड़ी चलाते
हैं , कफर दु र्यटना तो होनी ही है ।
जीिन की डोर अपने हाथ में लेना
यही जीवन में हो रहा है और इसीकलए इतना ज्यादा तनाव, इतना ज्यादा डर
है क्ोंकक कजंदगी में ज्यादातर चीजें अचेतन में हो रही हैं । आप क्ा कर रहे
हैं , आपका
शरीर क्ा कर रहा है , आपकी ऊजाय , आपके कवचार, आपकी भावनाएं क्ा
कर रही हैं , इन सब बातों के प्रकत केवल मुठ्ठीभर लोग ही जागरूक हैं । अगर
आप चेतना का दायरा बढ़ा लेते हैं तो अचानक आपको महसस होने लगता
है कक सबकुछ आपके अपने हार्थ में है । अगर आप अपने शरीर को
जागरूकता के सार्थ संभाल सकते हैं तो आपकी कजंदगी और भाग्य का
पंद्रह से बीस प्रकतशत आपके हार्थों में होगा। अगर आप अपनी सोचने की
शल्कि पर काब पा लेते हैं तो चालीस से पचास प्रकतशत भाग्य और कजंदगी
आपके हार्थों में होगी और अगर इसके सार्थ भावना भी जुड़ जाए तो
समकझए कक दोनों का चालीस से सत्तर प्रकतशत भाग आपने काब में कर
कलया। इसी तरह अपनी कजंदगी की सारी ऊजाय भी अगर आपने जागरूकता
के सार्थ संचाकलत कर ली तो अपनी कजंदगी और भाग्य का सौ प्रकतशत आप
अपनी मजी से चला पाएं गे यानी आपका अपनी कजंदगी पर परा वश होगा।
अगर आप अपने भीतर मौजद, खुद से परे की प्रज्ञा, कजसे हम ‘कचत्त’ कहते
हैं , उसके कलए उपलब्ध हो जाते हैं, तो आप केवल अपनी कजंदगी या अपना
भाग्य ही नहीं, बल्कि आपके इदय -कगदय जो अरबों लोग हैं , उनकी कजंदगी और
भाग्य भी तय कर सकते हैं । आप कचत्त को ईश्वरीय कृपा या कुछ और भी
कह सकते हैं । क्ा इं सान इन आयामों में आगे बढ़े गा, कुछ ढं ढ़ेगा या बस
पेट भरना, सोना, संतान पैदा करना और कफर एक कदन मर जाना, यही
उसका लक्ष्य है? इस बात से कोई फकय नहीं पड़ता कक आप कौन हैं , आप
क्ा काम करते हैं या आपके पास ककतना पैसा है । आपको यह सब भलने
की कोकशश करनी है , क्ोंकक मौत आपके सामने झल रही है ।
जीिन की मिशालता
ज्यादातर लोगों को यह समझ तब तक नहीं आती, जब तक कोई डॉक्टर
उन्हें भयानक रोग नहीं बता दे ता या जब तक वे बहत बढ़े नहीं हो जाते।
आप सां स लेते हैं और छोड़ते हैं और अगले पल आपको सां स न आए तो?
आप गए। तो यह जीवन इतना नाजुक है , सार्थ ही यह मजबत भी है । जब
तक हम कजंदा हैं , तब तक हम सोचते हैं कक हम ही सब कुछ हैं । लेककन इस
िरती पर मेरी और आपकी तरह न जाने ककतने लोग आए और यहां रहे , पर
आज वे कहां हैं? सब कमट्टी बन गए। एक न एक कदन हम भी मर जाएं गे और
इस िरती का कहस्सा बन जाएं गे। कल इस समय कोई और इस िरती पर
चल रहा होगा। कजंदगी बहत छोटी है । खासकर जब आप आनंद में हों तब
तो यह बहत ज्यादा छोटी है । यह केवल उन लोगों के कलए लंबी है , कजनकी
हालत दयनीय है । इं सान के पास जो कवशाल संभावना है उसको दे खते हए
हमें जो कजंदगी दी गई है , वह बहत ही छोटी है । लेककन उसमें भी लोग बोर
हो जाते हैं और इस जीवन की सरलता को जाने कबना ही अपने आप को
खत्म कर लेते हैं , क्ोंकक लोगों के शारीररक और मानकसक नाटक जीवन के
अल्कस्तत्व की वास्तकवकता से कहीं ज्यादा बड़े हो जाते हैं ।